नई दिल्ली. खांसी, गले में दुखन और जलन के साथ सांस लेने में तकलीफ होना कोरोना संक्रमण के सामान्य लक्षणों में शामिल हैं। इस तरह की दिक्कत होने पर लोग अक्सर बिना डाक्टर की सलाह के कफ सिरप का सेवन कर लेते हैं। इस बात में कोई शक भी नहीं है कि कफ सिरप लेने से इन दिक्कतों में आराम महसूस होता है, लेकिन यह बात तब फिट बैठती है, जब आपको सामान्य कारणों या बदलते मौसम के कारण गले से जुड़ी इस तरह की समस्याएं हो रही हों। कोरोना हम सभी के लिए एकदम नया वायरस था और इसके बारे में शुरुआत में किसी के पास कोई जानकारी नहीं थी। यही वजह है कि आज भी कोरोना पर लगातार रिसर्च हो रही हैं। हाल ही कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के शोधकत्र्ताओं ने इस बात पर परीक्षण किया कि यदि कोरोना से संक्रमित कोई व्यक्ति गले के दर्द और खांसी से राहत पाने के लिए कफ सिरप का उपयोग करता है तो उसकी सेहत पर कैसा असर पड़ता है। इस शोध को कोरोना संक्रमित अफ्रीकी बंदरों पर किया गया। क्योंकि इन बंदरों पर किसी भी दवाई का असर ठीक उसी तरह होता है, जैसे इंसान पर किसी दवा का असर होता है। शोध टीम से जुड़े प्रो. ब्रिएन का कहना है कि जब हमें शोध में इस तरह के परिणाम देखने को मिले कि बंदरों में कफ सिरप के उपयोग से कोरोना वायरस की संख्या में तेजी से बढ़ौतरी हो रही है, तब हमें लगा कि सभी लोगों को इस बात की जानकरी होनी चाहिए कि कोरोना संक्रमित होने पर उन्हें बिना डाक्टर की सलाह के कफ सिरप का सेवन नहीं करना है।
कफ सिरप लेने से बढ़ सकता है संक्रमण

